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सृजन साहित्यिक अभिरुचि मंच के तत्वाधान में एक आनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया

सृजन साहित्यिक अभिरुचि मंच के तत्वाधान में एक आनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया

दिनांक 14 मई 2020 गुरुवार को सृजन साहित्यिक अभिरुचि मंच के तत्वाधान में एक आनलाइन कावि सम्मेलन का आयोजन किया गया । जिसकी अध्यक्षता अलीगढ़ से पधारे प्रोफेसर राजेश कुमार जी ने की । इस अवसर पर मुख्य अतिथि बिसौली बदायूं के वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉक्टर सतीश चंद्र शर्मा सुधांशु जी रहे । इस कवि सम्मेलन में मध्य प्रदेश से वरिष्ठ हास्य कवि राजेंद्र विश्वकर्मा ने भी शिरकत की, तो पड़ौसी देश नेपाल की युवा गजलकारा सारिका अग्रवाल और हरदोई (उत्तर प्रदेश) से युवा हास्य कवि गोपाल ठहाका ,स्थानीय उदीयमान कवि दीपक गोस्वामी ‘चिराग’ भी इस ऑनलाइन कवि सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण रहे। रामपुर की युवा कवित्री कुमारी निकिता सिंह ने वाणी वंदना के द्वारा ऑनलाइन कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। तदुपरांत कवियों ने एक के बाद एक मनमोहक कविताओं के द्वारा रसों की वर्षा की।

मनोज कुमार शर्मा बिसोली ने जनता से लाकडाउन का पालन करने का आह्वान करते हुए कहा……

हाथ जोड़ विनती सभी से यही करता हूं ,
मोदी जी की बात मान घर में ही रहिए।
चीन की हो धृष्टता या प्रकृति का कोप हो,
शाला को शिवाला जान घर में ही रहिए।

ठाकुर द्वारा के युवा ग़ज़लकार पिंकेश चौहान ‘ तपन ‘ ने हाल में हुई जवानों की शहादत पर पाकिस्तान को धमकाते हुए कहा कि…..

साजिशों के जाल अब तो बुनना छोड़ दे,
अपनी जमीं पर आतंक पलना छोड़ दे।
मिट जायेगा बजूद वरना इक दिन तेरा,
यूँ छुप-छुपकर सीमा में घुसना छोड़ दे।।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ0सतीश चंद्र शर्मा “सुधांशु” ने माँ को कुछ ऐसे बयां किया….

शब्द बहुत छोटा मगर,इसका विस्तृत अर्थ।
समझ सका ना अर्थ तो, ये जीवन है व्यर्थ।।

बहजोई नगर के दीपक गोस्वामी ‘चिराग’ ने प्रवासी मजदूरों की दशा पर द्रवित करने वाली रचना पेश की.।दीपक गोस्वामी ‘चिराग’ ने कहा..।

आँखों में आंसू हैं, पांवों में हैं छाले, ऊपर से ये लाठी, तौबा रे! तौबा रे!

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अलीगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार ,समीक्षक एवं कवि डॉ राजेशकुमार ने कहा..

जागो, जागो दुनिया मेँ यह भय छाया हैl
कालरूप बन कर कोरोना अब आया हैll
गौरी माता !आज कालिका ही बन जाओl
रक्तबीज-से कोरोना पर अब तन जाओll

पडौसी देश नेपाल की युवा ग़ज़लकारा…. ने अपने मखमली स्वर में ग़ज़ल गुनगुनाते हुए कहा…..

शब्द मिलते नहीं गीत मैं क्या लिखूँ।
प्रीत निभती नहीं, रीत मैं क्या लिखूँ।

मध्यप्रदेश के हास्य कवि राजेन्द्र विश्वकर्मा की कोरोना गीत से कुछ पंक्तिया इस प्रकार है…।

शहर सुनसान है,
राहें वीरान है
सूना है हर गली का
जो कोना यहां।
जिसको ये लग गया
वो जिंदगी से गया,
चाइना से है आया
कोरोना यहां

बहजोई के ही युवा कवि वेंकट कुमार ने लाकडाउन के प्रकृति पर हुए सकारात्मक प्रभाव को शब्दों में ढाल कर कुछ यों गाया….

कोरोना ने खोल दिये प्रकृति के किवाड़ जैसे,
आज पहाड़ दूर-दूर के दिखत हैं।

रामपुर की युवा कवियत्री कु. निकेतिका सिंह ने कुछ यों गुनगुनाया…।

मैं नारी हूँ मुझी से तुम ये सब संसार पाओगे।
मुझे सम्मान गर दोगे तो मुझसे प्यार पाओगे
लगाओ दांव पे मुझको ये क्या अधिकार है तुमको
मैं हूँ वस्तु नही जो तुम जुए में हार जाओगे ।

हरदोई के युवा हास्य कवि गोपाल ठहाका ने भी श्रोताओं को ठहाके लगवाते हुए कहा….।

कोरोना का भय हमें, करता नित लाचार |
पत्नी का भी हाथ अब छूना है दुश्वार ||

रामपुर के कवि सत्यवीर सिंह उजाला ने हाल ही में शहीद हुए वीर सैनिकों को याद करते हुए शब्दांजलि दी

इन नम आँखों से ,कैसे श्रद्धाँजलि लिख दूँ |
रख आग हृदय में ,कैसे पुष्पाँजलि रख दूँ |
मृत्युंजय का महामंत्र जगा लिया तुमने तो
वीर वैरागियों के हित ,निज प्राणाँजलि रख दूँ |

बदायूँ के युवा शायर मोहित शर्मा ने कुछ अशआर यूँ बयां किए…

खुद को मनवाने का जो हौसला होता ही नहीं।
तो अपने दरमियां ये फासला होता ही नहीं।।
तमाम उम्र भले आईना दिखाते रहो।
वक़्त से बढ़के कोई आईना होता ही नहीं।।

राजेश यादव तन्हा, प्रदीप शर्मा ‘दीप’,ज्ञान प्रकाश, राहुल गोयल आदि ने भी अपनी कविताओं से खूब वाह वाही बटोरी। इस आनलाइन कवि सम्मेलन में अल्पा गोयल ,हरिओम, अविजीत,आदि श्रोताओं ने भी प्रति भाग कर ..कवियों की हौसलाअफजाई की। कार्यक्रम की अध्यक्षता पी. सी. बाग्ला कालिज के हिंदी के प्रो. राजेश कुमार जी ने और सरस संचालन कवि दीपक गोस्वामी ‘चिराग’ ने किया।

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